हम सभी जानते हैं कि जब शरीर में कहीं दर्द हो या कोई अंदरूनी समस्या महसूस हो, तो सबसे पहले मन में यही आता है कि आखिर क्या हुआ है? आजकल डॉक्टर अक्सर किसी भी गंभीर समस्या का पता लगाने के लिए एमआरआई (MRI) स्कैन कराने की सलाह देते हैं.
यह नाम सुनते ही कई लोगों को घबराहट होने लगती है, खासकर उन लोगों को जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है या जिन्होंने कभी यह अनुभव नहीं किया है. मुझे याद है जब पहली बार मेरे एक करीबी को एमआरआई स्कैन कराना पड़ा था, तो हम सभी बहुत चिंतित थे कि यह कैसा अनुभव होगा.
क्या इसमें दर्द होगा? क्या यह बहुत देर तक चलेगा? इस तरह के ढेरों सवाल मन में घूमते रहते हैं.
आजकल एमआरआई तकनीकें काफी विकसित हो गई हैं. अब केवल बीमारी का पता लगाना ही नहीं, बल्कि मरीजों के आराम और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. कई नई मशीनें कम शोर करती हैं और पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से स्कैन पूरा कर लेती हैं.
भविष्य में तो एआई (AI) की मदद से स्कैन की गुणवत्ता और भी बेहतर होगी और रिपोर्ट भी जल्दी मिलेगी, लेकिन किसी भी नई चीज़ को लेकर थोड़ी अनिश्चितता तो रहती ही है.
इसलिए, किसी और के अनुभव को सुनना या पढ़ना बहुत मददगार साबित होता है. मैंने खुद देखा है कि जब हम दूसरों के अनुभवों से सीखते हैं, तो हमें एक अलग तरह की हिम्मत और जानकारी मिलती है.
इस ब्लॉग में हम उन सभी सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे जो एक एमआरआई स्कैन से पहले आपके मन में आते हैं. नीचे दिए गए लेख में हम विभिन्न लोगों के एमआरआई अनुभव, उनसे जुड़ी सावधानियां और कुछ अहम सुझावों के बारे में विस्तार से जानेंगे ताकि आपका अनुभव आरामदायक और जानकारीपूर्ण हो.
आइए, अब इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
एमआरआई स्कैन से पहले की घबराहट: आखिर क्या होती है ये चीज़?

एमआरआई क्यों जरूरी है और यह कैसे काम करता है?
क्या एमआरआई में दर्द होता है? मेरा व्यक्तिगत अनुभव
आजकल जब भी शरीर में कोई ऐसी समस्या आती है जिसका कारण डॉक्टर को साफ समझ नहीं आता, तो सबसे पहले एमआरआई स्कैन का नाम सामने आता है. मुझे याद है, जब मेरे घुटने में तेज दर्द हुआ था और एक्स-रे में कुछ खास नहीं दिखा, तब डॉक्टर ने तुरंत एमआरआई कराने की सलाह दी.
उस वक्त मेरे मन में हजारों सवाल थे. क्या यह दर्दनाक होगा? क्या मैं उस मशीन के अंदर ठीक से रह पाऊंगा?
एमआरआई, यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, एक ऐसी तकनीक है जो शरीर के अंदर की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए शक्तिशाली मैग्नेट और रेडियो तरंगों का उपयोग करती है.
यह एक्स-रे या सीटी स्कैन से अलग है क्योंकि इसमें रेडिएशन का उपयोग नहीं होता. यह हड्डियों के साथ-साथ नरम ऊतकों, जैसे मांसपेशियां, टेंडन, लिगामेंट्स और मस्तिष्क की बहुत स्पष्ट तस्वीरें देता है.
यही वजह है कि डॉक्टर अक्सर इसे रीढ़ की हड्डी की समस्याओं, मस्तिष्क ट्यूमर, जोड़ों की चोटों या अंदरूनी अंगों की बीमारियों का पता लगाने के लिए सबसे भरोसेमंद मानते हैं.
मुझे खुशी हुई जब मेरे दोस्त ने बताया कि एमआरआई में कोई दर्द नहीं होता, बस थोड़ी देर स्थिर रहना पड़ता है. यह जानकर मेरी आधी चिंता दूर हो गई थी. मेरा अनुभव तो यही रहा कि दर्द नहीं होता, बस मशीन का शोर थोड़ा अजीब लग सकता है.
एमआरआई से पहले की तैयारी: कुछ खास बातें जो आपको पता होनी चाहिए
खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक: तैयारी के अहम टिप्स
मेटल डिटेक्टर और आपकी सुरक्षा
एमआरआई स्कैन से पहले की तैयारी उतनी मुश्किल नहीं है जितनी लगती है, पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, आपको अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन को अपनी सभी मेडिकल कंडीशन, एलर्जी और अगर कोई मेटल इंप्लांट (जैसे पेसमेकर, कृत्रिम जोड़, डेंटल इंप्लांट, या बॉडी पियर्सिंग) है तो उसके बारे में बताना होगा. यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि एमआरआई में शक्तिशाली चुंबक होते हैं और मेटल चीजें गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं. मुझे याद है मेरी एक सहेली को पियर्सिंग उतरवाने के लिए कहा गया था, और वह थोड़ी परेशान हुई थी, पर सुरक्षा सबसे पहले है. स्कैन से 4-6 घंटे पहले कुछ भी खाने-पीने से मना किया जा सकता है, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (एक खास डाई) का उपयोग होना हो. आरामदायक और ढीले कपड़े पहनना सबसे अच्छा रहता है, ऐसे कपड़े जिनमें कोई धातु न हो, जैसे ज़िप या बटन. मुझे तो अस्पताल से ही खास गाउन मिल गया था. स्कैन से पहले सभी गहने, घड़ी, चश्मे, हेयरपिन और यहां तक कि क्रेडिट कार्ड भी निकाल देने चाहिए. टेक्नीशियन आपको एक मेटल डिटेक्टर से भी चेक कर सकते हैं ताकि सुनिश्चित हो सके कि आपके शरीर पर कोई धातु नहीं है. ये सारी सावधानियां सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए हैं, इसलिए घबराने की बजाय उनका पालन करें.
बंद जगहों से डर लगता है? ओपन एमआरआई एक अच्छा विकल्प!
क्लस्ट्रोफोबिया और एमआरआई: कैसे करें मुकाबला?
ओपन एमआरआई: सुविधा और आराम
हम में से कई लोगों को बंद या संकीर्ण जगहों से डर लगता है, जिसे क्लस्ट्रोफोबिया कहते हैं. जब बात एमआरआई स्कैन की आती है, तो यह डर कुछ लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है. मुझे भी हल्की सी घबराहट महसूस हुई थी जब मैं पहली बार उस लंबी और गोल मशीन में जाने वाला था. यह सच है कि पारंपरिक एमआरआई मशीनें एक सुरंग जैसी होती हैं, और कुछ लोगों को इसमें बेचैनी महसूस हो सकती है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब इसके लिए एक बेहतरीन समाधान उपलब्ध है: ओपन एमआरआई! ओपन एमआरआई मशीनें दोनों तरफ से खुली होती हैं और पूरी तरह से बंद नहीं होतीं, जिससे मरीज को कम घुटन महसूस होती है. इसमें ऊपर और नीचे दो फ्लैट मैग्नेट होते हैं और बीच में जगह खुली रहती है. यह उन लोगों के लिए एक वरदान है जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है, या जो बहुत मोटे हैं, या छोटे बच्चे जो हिलते-डुलते रहते हैं. मैंने खुद एक मरीज को देखा है जिसे पारंपरिक एमआरआई से बहुत दिक्कत हुई थी, लेकिन ओपन एमआरआई में वह आराम से स्कैन करवा पाए. इससे घबराहट कम होती है और स्कैन पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है. अगर आपको भी ऐसी कोई चिंता है, तो अपने डॉक्टर से ओपन एमआरआई के बारे में बात जरूर करें.
बच्चों और बुजुर्गों के लिए एमआरआई: खास देखभाल और समझ
छोटे बच्चों को कैसे तैयार करें?
बुजुर्ग मरीजों के लिए विशेष विचार
एमआरआई स्कैन बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक अलग तरह का अनुभव हो सकता है, और उन्हें विशेष देखभाल और समझ की जरूरत होती है. छोटे बच्चों के लिए यह पूरी प्रक्रिया डरावनी हो सकती है, क्योंकि उन्हें चुपचाप लेटे रहना पड़ता है और मशीन का शोर भी उन्हें परेशान कर सकता है. मेरे भतीजे का जब एमआरआई हुआ था, तो हमने उसे पहले से ही एक कहानी की तरह समझाया था कि वह एक “अंतरिक्ष यान” में जाने वाला है और उसे “सुपरहीरो” की तरह स्थिर रहना होगा. कई बार बच्चों को स्कैन के दौरान शांत रखने के लिए हल्की नींद की दवा दी जाती है. कुछ अस्पताल बच्चों के लिए विशेष एमआरआई मशीनें और माहौल भी प्रदान करते हैं, जैसे कि कार्टून दिखाना या हेडफ़ोन में उनकी पसंद का संगीत चलाना. वहीं, बुजुर्ग मरीजों के लिए भी कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. उन्हें अक्सर जोड़ों का दर्द या पीठ की समस्या होती है, जिससे लंबे समय तक एक ही स्थिति में लेटना मुश्किल हो सकता है. मुझे याद है मेरे दादाजी को एमआरआई के दौरान पीठ दर्द होने लगा था, तो टेक्नीशियन ने उन्हें थोड़ा सपोर्ट देने के लिए तकिया दिया था. उनके लिए पहले से ही बाथरूम जाने और आरामदायक कपड़े पहनने की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण है. बुजुर्गों को प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट और सरल भाषा में समझाना भी बहुत जरूरी है ताकि वे कम चिंतित महसूस करें.
| एमआरआई अनुभव को बेहतर बनाने के टिप्स | विवरण |
|---|---|
| शांत रहने का प्रयास करें | गहरी सांस लें, मनपसंद संगीत सुनें (अगर हेडफोन उपलब्ध हों)। |
| सभी धातु की चीजें हटा दें | गहने, घड़ी, हेयरपिन, क्रेडिट कार्ड – सब कुछ निकाल दें। |
| टेक्नीशियन से खुलकर बात करें | कोई भी चिंता या असुविधा हो तो तुरंत बताएं। |
| ओपन एमआरआई का विकल्प जानें | अगर बंद जगहों से डर लगता है, तो इस विकल्प पर विचार करें। |
| खाली पेट रहें (अगर कहा जाए) | कॉन्ट्रास्ट एजेंट के उपयोग पर खाने-पीने से बचें। |
एमआरआई रिपोर्ट समझना: घबराएं नहीं, डॉक्टर से बात करें

रिपोर्ट में क्या-क्या होता है?
गूगल के बजाय डॉक्टर पर भरोसा करें
एमआरआई स्कैन के बाद सबसे उत्सुकता रिपोर्ट का इंतजार रहता है. जब रिपोर्ट हाथ में आती है, तो उसमें लिखे मेडिकल शब्द और जटिल विवरण देखकर अक्सर लोग घबरा जाते हैं. मुझे याद है जब मेरी रिपोर्ट आई थी, तो उसमें ‘टी2 हाइपरइंटेंसिटी’ जैसे शब्द देखकर मेरा सिर चकरा गया था. रिपोर्ट में आमतौर पर डॉक्टर द्वारा देखा गया विवरण, संभावित डायग्नोसिस और निष्कर्ष शामिल होता है. इसमें आपके शरीर के स्कैन किए गए हिस्से की विस्तृत जानकारी होती है, जैसे किसी असामान्य वृद्धि, सूजन, चोट या अन्य समस्या का उल्लेख. सबसे बड़ी गलती जो हम में से कई लोग करते हैं, वह है रिपोर्ट को लेकर सीधे गूगल करना. मेरा मानना है कि यह और भी ज्यादा चिंता पैदा करता है क्योंकि इंटरनेट पर हर लक्षण के लिए सबसे खराब संभावना बताई जाती है. मैंने खुद देखा है कि लोग इंटरनेट पर पढ़कर अपनी बीमारी का ‘स्व-निदान’ कर लेते हैं और फिर अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं. मेरी सलाह है कि रिपोर्ट मिलते ही तुरंत अपने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें. वे ही सबसे अच्छे तरीके से आपको रिपोर्ट समझा सकते हैं, आपके सवालों के जवाब दे सकते हैं और आगे के इलाज के बारे में बता सकते हैं. डॉक्टर ही सबसे सही जानकारी देंगे और अनावश्यक डर को दूर कर सकते हैं.
एमआरआई के बाद: क्या कोई साइड इफेक्ट्स होते हैं?
सामान्य अनुभव और कॉन्ट्रास्ट एजेंट के प्रभाव
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
एमआरआई स्कैन खत्म होने के बाद अक्सर मरीज यह सोचते हैं कि क्या इसका कोई साइड इफेक्ट भी होगा. आमतौर पर, एमआरआई एक सुरक्षित प्रक्रिया है और इसके तुरंत बाद कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते. मुझे तो स्कैन के बाद बस थोड़ा थका हुआ महसूस हुआ था, जो शायद इतने समय तक एक ही स्थिति में लेटे रहने और हल्की घबराहट की वजह से था. अधिकांश लोग स्कैन के तुरंत बाद अपनी सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं. हालांकि, अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (गैडोलिनियम) का उपयोग किया गया है, तो कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, खुजली या चकत्ते हो सकते हैं. कुछ दुर्लभ मामलों में, गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं, लेकिन ये बहुत कम देखने को मिलती हैं. यह जानना जरूरी है कि अगर आपको किडनी की समस्या है, तो कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग सावधानी से किया जाता है, या नहीं भी किया जाता. अगर आपको स्कैन के बाद सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, या सांस लेने में दिक्कत जैसे कोई असामान्य लक्षण महसूस होते हैं, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग हुआ है, तो तुरंत अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन से संपर्क करना चाहिए. हालांकि, ज्यादातर मामलों में, एमआरआई एक बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित प्रक्रिया साबित होती है, जिससे आप बिना किसी चिंता के घर जा सकते हैं.
भविष्य की एमआरआई तकनीकें: एआई और नई उम्मीदें
तेज और सटीक स्कैन: एआई की भूमिका
मरीज के अनुभव को बेहतर बनाना
आजकल हम हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बात सुनते हैं, और एमआरआई तकनीक भी इससे अछूती नहीं है. मुझे लगता है कि भविष्य में एमआरआई स्कैन हमारे लिए और भी आसान और सटीक होने वाला है. वैज्ञानिक लगातार नई एमआरआई मशीनों पर काम कर रहे हैं जो पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से स्कैन कर सकेंगी और तस्वीरें भी बेहद साफ होंगी. एआई इसमें एक बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा. एआई की मदद से स्कैन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकेगा, जिससे डॉक्टर छोटे से छोटे बदलावों को भी आसानी से पहचान पाएंगे. साथ ही, एआई स्कैनिंग प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेगा, जिससे मरीज को मशीन के अंदर कम समय बिताना पड़ेगा. मेरे एक दोस्त जो मेडिकल टेक्नोलॉजी में हैं, उन्होंने बताया कि एआई की मदद से एमआरआई रिपोर्टिंग भी बहुत तेज और सटीक हो जाएगी. मशीन खुद ही असामान्यताओं को चिह्नित कर देगी, जिससे डॉक्टरों का समय बचेगा और वे मरीज के इलाज पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे. भविष्य में, हम ऐसी एमआरआई मशीनें भी देख सकते हैं जो और भी कम शोर करेंगी, और शायद ऐसी भी हों जिनमें मरीज वर्चुअल रियलिटी हेडसेट पहनकर स्कैन के दौरान खुद को किसी शांत जगह पर महसूस कर सके. इन सभी बदलावों से एमआरआई का अनुभव न केवल कम डरावना होगा, बल्कि यह डॉक्टरों को बीमारियों का पता लगाने और उनका इलाज करने में भी बहुत मदद करेगा.
अंत में कुछ बातें
तो दोस्तों, एमआरआई स्कैन जितना डरावना लगता है, असल में उतना होता नहीं है। मुझे अपनी पहली एमआरआई का अनुभव याद है, कितनी घबराहट हुई थी, पर अब मैं जानता हूँ कि सही जानकारी और थोड़ी तैयारी के साथ यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है। यह हमारे शरीर के अंदर की ऐसी तस्वीरें दिखाती है जो और कोई तकनीक नहीं दिखा पाती, और बीमारियों का सही पता लगाने में डॉक्टरों की बहुत मदद करती है। इसलिए, अगर आपके डॉक्टर एमआरआई की सलाह देते हैं, तो घबराइए मत, बस बताई गई बातों का ध्यान रखिए और बेझिझक अपने सारे सवाल पूछिए। आपकी सेहत सबसे पहले है, और एमआरआई उसमें एक महत्वपूर्ण कदम है।
कुछ उपयोगी बातें जो आपको पता होनी चाहिए
1. एमआरआई से पहले अपने डॉक्टर को अपनी सभी मेडिकल कंडीशन, खासकर किसी भी धातु के इंप्लांट (जैसे पेसमेकर, आर्टिफिशियल जॉइंट) के बारे में जरूर बताएं। यह आपकी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
2. आरामदायक, ढीले कपड़े पहनें जिनमें कोई धातु न हो। गहने, घड़ी और क्रेडिट कार्ड जैसी सभी धातु की चीजें स्कैन से पहले हटा दें।
3. अगर आपको बंद जगहों से डर लगता है (क्लस्ट्रोफोबिया), तो अपने डॉक्टर से ओपन एमआरआई के विकल्प के बारे में पूछें। यह आपके अनुभव को काफी बेहतर बना सकता है।
4. स्कैन के दौरान पूरी तरह स्थिर रहने की कोशिश करें। हल्की सी भी हरकत तस्वीरों को धुंधला कर सकती है, जिससे स्कैन दोबारा करना पड़ सकता है। टेक्नीशियन की बात ध्यान से सुनें।
5. एमआरआई रिपोर्ट मिलने पर उसे खुद गूगल करने के बजाय सीधे अपने डॉक्टर से मिलकर समझें। डॉक्टर ही आपको सही जानकारी और आगे के इलाज के बारे में बता सकते हैं, जिससे अनावश्यक चिंता से बचा जा सकता है।
मुख्य बातों का सारांश
एमआरआई स्कैन शरीर के अंदर की विस्तृत और स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए एक शक्तिशाली और रेडिएशन-मुक्त तकनीक है। यह हड्डियों के साथ-साथ नरम ऊतकों, जैसे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, जोड़ों और अंगों की समस्याओं का पता लगाने में बेहद कारगर है। मेरा निजी अनुभव रहा है कि इसमें कोई दर्द नहीं होता, बस मशीन का शोर थोड़ा असहज कर सकता है और आपको थोड़ी देर स्थिर रहना पड़ता है। स्कैन से पहले तैयारी के तौर पर धातु की सभी चीजें हटाना, आरामदायक कपड़े पहनना और अपने मेडिकल इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप क्लस्ट्रोफोबिया से ग्रस्त हैं, तो ओपन एमआरआई एक शानदार विकल्प है जो आपको अधिक सहज महसूस कराएगा। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, जिसमें उन्हें प्रक्रिया के बारे में समझाना और स्कैन के दौरान आराम सुनिश्चित करना शामिल है। एमआरआई रिपोर्ट को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए हमेशा अपने डॉक्टर पर भरोसा करें और उनसे ही रिपोर्ट के बारे में पूरी जानकारी लें, न कि इंटरनेट पर खुद से इलाज खोजने की कोशिश करें। आमतौर पर, एमआरआई के बाद कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते, हालांकि कॉन्ट्रास्ट एजेंट के उपयोग पर हल्की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। कुल मिलाकर, एमआरआई एक सुरक्षित और अत्यंत उपयोगी मेडिकल जांच है जो सही निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुझे उम्मीद है कि इस जानकारी से आपकी चिंताएँ कम होंगी और आप एक आत्मविश्वास के साथ इस प्रक्रिया का सामना कर पाएँगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: एमआरआई स्कैन से पहले मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और तैयारी कैसे करें?
उ: देखिए, एमआरआई स्कैन से पहले की तैयारी बहुत ही आसान होती है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि स्कैन सही से हो सके और आपको कोई परेशानी न हो.
सबसे पहले और सबसे अहम बात यह है कि आपको अपने शरीर पर किसी भी तरह की धातु (metal) की चीज़ें नहीं रखनी चाहिए. इसका मतलब है कि स्कैन से पहले आपको अपनी घड़ी, अंगूठियां, हार, बालियां, हेयरपिन, और यहाँ तक कि कुछ मेकअप प्रोडक्ट्स (जिनमें धातु के कण हो सकते हैं) भी उतारने होंगे.
मुझे याद है जब मेरे एक दोस्त को एमआरआई करवाना था, तो उसने अपनी जींस पहन ली थी जिसमें धातु की ज़िप और बटन थे, और उसे ऐन वक्त पर कपड़े बदलने पड़े थे! तो, ढीले-ढाले, आरामदायक कपड़े पहन कर जाना सबसे अच्छा रहता है जिनमें कोई धातु न हो.
इसके अलावा, अगर आपके शरीर में कोई धातु का इम्प्लांट है, जैसे पेसमेकर, आर्टिफ़िशियल जॉइंट, धातु के क्लिप्स, कॉक्लियर इम्प्लांट, या कोई और सर्जिकल पिन, तो इसके बारे में अपने डॉक्टर और एमआरआई सेंटर के स्टाफ को ज़रूर बताएं.
ये बहुत ज़रूरी जानकारी है क्योंकि कुछ धातु एमआरआई मशीन के चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित हो सकती हैं. अगर आपको किसी दवा से एलर्जी है या आपको किडनी की कोई समस्या है (खासकर अगर स्कैन में कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल होना है), तो यह भी पहले से बताना न भूलें.
कुछ स्कैन के लिए आपको कुछ घंटे पहले खाने-पीने से परहेज़ करने के लिए भी कहा जा सकता है, तो अपने डॉक्टर की सभी सलाहों को ध्यान से सुनें और उनका पालन करें.
मेरा अनुभव कहता है कि अगर आप पहले से तैयार होकर जाते हैं, तो आपका स्कैन बहुत आराम से हो जाता है.
प्र: एमआरआई स्कैन के दौरान मुझे कैसा महसूस होगा, और क्या यह दर्दनाक होता है?
उ: एमआरआई स्कैन के दौरान कैसा महसूस होता है, यह हर किसी के लिए थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन एक बात मैं आपको दावे से कह सकता हूँ कि यह दर्दनाक बिल्कुल नहीं होता!
हाँ, थोड़ा अजीब और कभी-कभी असहज ज़रूर लग सकता है. आपको एक लंबी, संकरी सुरंग जैसी मशीन के अंदर लेटाया जाएगा, जो कई लोगों के लिए थोड़ी घबराहट पैदा कर सकती है, खासकर अगर आपको बंद जगहों से डर लगता हो (जिसे क्लॉस्ट्रोफोबिया कहते हैं).
लेकिन घबराइए नहीं, तकनीशियन आपसे लगातार बात करते रहेंगे और आपको कोई भी दिक्कत होने पर आप उनसे संपर्क कर सकते हैं. स्कैन के दौरान आपको कुछ तेज़ आवाज़ें सुनाई देंगी, जैसे खट-खट या धक-धक की आवाज़ें, क्योंकि एमआरआई मशीन चुंबकीय तरंगों का उपयोग करती है.
ये आवाज़ें काफी तेज़ हो सकती हैं, इसलिए आपको हेडफ़ोन या ईयरप्लग दिए जाएंगे ताकि आवाज़ कम लगे. मुझे खुद जब मेरा हाथ स्कैन हुआ था, तो उन आवाज़ों से थोड़ा अजीब लगा था, पर हेडफ़ोन लगाने के बाद ठीक हो गया था.
सबसे ज़रूरी चीज़ है स्कैन के दौरान बिल्कुल हिलना-डुलना नहीं. अगर आप हिलेंगे तो स्कैन की तस्वीरें धुंधली आ सकती हैं, जिससे स्कैन दोबारा करना पड़ सकता है.
यह प्रक्रिया आमतौर पर 30 मिनट से एक घंटे तक चल सकती है, जो स्कैन किए जाने वाले हिस्से पर निर्भर करता है. थोड़ा बोरिंग लग सकता है, लेकिन कोई दर्द नहीं होता, बस आपको शांत रहना है.
प्र: क्या बंद जगहों से डरने वाले (क्लॉस्ट्रोफोबिक) लोग भी एमआरआई करवा सकते हैं, और इसके लिए क्या उपाय हैं?
उ: यह बहुत ही आम सवाल है, और मुझे पता है कि कई लोग इस वजह से एमआरआई करवाने से कतराते हैं. मुझे याद है मेरे एक पड़ोसी को क्लॉस्ट्रोफोबिया की वजह से एमआरआई करवाने में बहुत दिक्कत हो रही थी.
लेकिन हाँ, बंद जगहों से डरने वाले लोग भी एमआरआई करवा सकते हैं, और इसके लिए कुछ बेहतरीन उपाय भी उपलब्ध हैं. सबसे पहले, आप अपने डॉक्टर को अपनी इस परेशानी के बारे में ज़रूर बताएं.
वे आपको स्कैन से पहले कुछ हल्की नींद की दवा या एंटी-एंजाइटी दवा लेने की सलाह दे सकते हैं, जिससे आपको स्कैन के दौरान शांत रहने में मदद मिलेगी. यह मेरे पड़ोसी के लिए बहुत कारगर साबित हुआ था.
आजकल ‘ओपन एमआरआई’ मशीनें भी उपलब्ध हैं, जो सामान्य एमआरआई मशीनों जितनी बंद नहीं होतीं. ये मशीनें ज़्यादा खुली होती हैं और उनमें claustrophobia का डर कम लगता है.
अगर आपके शहर में ऐसी सुविधा उपलब्ध है, तो आप उसके बारे में पूछ सकते हैं. स्कैन के दौरान, आप अपनी आँखें बंद रखने की कोशिश करें और गहरी सांसें लें, ताकि आपका ध्यान मशीन के अंदर होने के बजाय अपनी साँस पर केंद्रित रहे.
आप चाहें तो तकनीशियन से पूछ सकते हैं कि क्या आप संगीत सुन सकते हैं या नहीं. कुछ सेंटर्स हेडफ़ोन के साथ संगीत की सुविधा भी देते हैं, जो आपको शांत रखने में मदद कर सकता है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अकेले नहीं हैं, और आपकी चिंता को समझा जाता है. अगर आप पहले से तैयारी और सही जानकारी के साथ जाते हैं, तो यह अनुभव भी उतना बुरा नहीं होगा जितना आप सोच रहे हैं.
📚 संदर्भ
➤ 3. एमआरआई से पहले की तैयारी: कुछ खास बातें जो आपको पता होनी चाहिए
– 3. एमआरआई से पहले की तैयारी: कुछ खास बातें जो आपको पता होनी चाहिए
➤ खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक: तैयारी के अहम टिप्स
– खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक: तैयारी के अहम टिप्स
➤ एमआरआई स्कैन से पहले की तैयारी उतनी मुश्किल नहीं है जितनी लगती है, पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, आपको अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन को अपनी सभी मेडिकल कंडीशन, एलर्जी और अगर कोई मेटल इंप्लांट (जैसे पेसमेकर, कृत्रिम जोड़, डेंटल इंप्लांट, या बॉडी पियर्सिंग) है तो उसके बारे में बताना होगा.
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि एमआरआई में शक्तिशाली चुंबक होते हैं और मेटल चीजें गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं. मुझे याद है मेरी एक सहेली को पियर्सिंग उतरवाने के लिए कहा गया था, और वह थोड़ी परेशान हुई थी, पर सुरक्षा सबसे पहले है.
स्कैन से 4-6 घंटे पहले कुछ भी खाने-पीने से मना किया जा सकता है, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (एक खास डाई) का उपयोग होना हो. आरामदायक और ढीले कपड़े पहनना सबसे अच्छा रहता है, ऐसे कपड़े जिनमें कोई धातु न हो, जैसे ज़िप या बटन.
मुझे तो अस्पताल से ही खास गाउन मिल गया था. स्कैन से पहले सभी गहने, घड़ी, चश्मे, हेयरपिन और यहां तक कि क्रेडिट कार्ड भी निकाल देने चाहिए. टेक्नीशियन आपको एक मेटल डिटेक्टर से भी चेक कर सकते हैं ताकि सुनिश्चित हो सके कि आपके शरीर पर कोई धातु नहीं है.
ये सारी सावधानियां सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए हैं, इसलिए घबराने की बजाय उनका पालन करें.
– एमआरआई स्कैन से पहले की तैयारी उतनी मुश्किल नहीं है जितनी लगती है, पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, आपको अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन को अपनी सभी मेडिकल कंडीशन, एलर्जी और अगर कोई मेटल इंप्लांट (जैसे पेसमेकर, कृत्रिम जोड़, डेंटल इंप्लांट, या बॉडी पियर्सिंग) है तो उसके बारे में बताना होगा.
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि एमआरआई में शक्तिशाली चुंबक होते हैं और मेटल चीजें गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं. मुझे याद है मेरी एक सहेली को पियर्सिंग उतरवाने के लिए कहा गया था, और वह थोड़ी परेशान हुई थी, पर सुरक्षा सबसे पहले है.
स्कैन से 4-6 घंटे पहले कुछ भी खाने-पीने से मना किया जा सकता है, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (एक खास डाई) का उपयोग होना हो. आरामदायक और ढीले कपड़े पहनना सबसे अच्छा रहता है, ऐसे कपड़े जिनमें कोई धातु न हो, जैसे ज़िप या बटन.
मुझे तो अस्पताल से ही खास गाउन मिल गया था. स्कैन से पहले सभी गहने, घड़ी, चश्मे, हेयरपिन और यहां तक कि क्रेडिट कार्ड भी निकाल देने चाहिए. टेक्नीशियन आपको एक मेटल डिटेक्टर से भी चेक कर सकते हैं ताकि सुनिश्चित हो सके कि आपके शरीर पर कोई धातु नहीं है.
ये सारी सावधानियां सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए हैं, इसलिए घबराने की बजाय उनका पालन करें.
➤ बंद जगहों से डर लगता है? ओपन एमआरआई एक अच्छा विकल्प!
– बंद जगहों से डर लगता है? ओपन एमआरआई एक अच्छा विकल्प!
➤ हम में से कई लोगों को बंद या संकीर्ण जगहों से डर लगता है, जिसे क्लस्ट्रोफोबिया कहते हैं. जब बात एमआरआई स्कैन की आती है, तो यह डर कुछ लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
मुझे भी हल्की सी घबराहट महसूस हुई थी जब मैं पहली बार उस लंबी और गोल मशीन में जाने वाला था. यह सच है कि पारंपरिक एमआरआई मशीनें एक सुरंग जैसी होती हैं, और कुछ लोगों को इसमें बेचैनी महसूस हो सकती है.
लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब इसके लिए एक बेहतरीन समाधान उपलब्ध है: ओपन एमआरआई! ओपन एमआरआई मशीनें दोनों तरफ से खुली होती हैं और पूरी तरह से बंद नहीं होतीं, जिससे मरीज को कम घुटन महसूस होती है.
इसमें ऊपर और नीचे दो फ्लैट मैग्नेट होते हैं और बीच में जगह खुली रहती है. यह उन लोगों के लिए एक वरदान है जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है, या जो बहुत मोटे हैं, या छोटे बच्चे जो हिलते-डुलते रहते हैं.
मैंने खुद एक मरीज को देखा है जिसे पारंपरिक एमआरआई से बहुत दिक्कत हुई थी, लेकिन ओपन एमआरआई में वह आराम से स्कैन करवा पाए. इससे घबराहट कम होती है और स्कैन पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है.
अगर आपको भी ऐसी कोई चिंता है, तो अपने डॉक्टर से ओपन एमआरआई के बारे में बात जरूर करें.
– हम में से कई लोगों को बंद या संकीर्ण जगहों से डर लगता है, जिसे क्लस्ट्रोफोबिया कहते हैं. जब बात एमआरआई स्कैन की आती है, तो यह डर कुछ लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
मुझे भी हल्की सी घबराहट महसूस हुई थी जब मैं पहली बार उस लंबी और गोल मशीन में जाने वाला था. यह सच है कि पारंपरिक एमआरआई मशीनें एक सुरंग जैसी होती हैं, और कुछ लोगों को इसमें बेचैनी महसूस हो सकती है.
लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब इसके लिए एक बेहतरीन समाधान उपलब्ध है: ओपन एमआरआई! ओपन एमआरआई मशीनें दोनों तरफ से खुली होती हैं और पूरी तरह से बंद नहीं होतीं, जिससे मरीज को कम घुटन महसूस होती है.
इसमें ऊपर और नीचे दो फ्लैट मैग्नेट होते हैं और बीच में जगह खुली रहती है. यह उन लोगों के लिए एक वरदान है जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है, या जो बहुत मोटे हैं, या छोटे बच्चे जो हिलते-डुलते रहते हैं.
मैंने खुद एक मरीज को देखा है जिसे पारंपरिक एमआरआई से बहुत दिक्कत हुई थी, लेकिन ओपन एमआरआई में वह आराम से स्कैन करवा पाए. इससे घबराहट कम होती है और स्कैन पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है.
अगर आपको भी ऐसी कोई चिंता है, तो अपने डॉक्टर से ओपन एमआरआई के बारे में बात जरूर करें.
➤ बच्चों और बुजुर्गों के लिए एमआरआई: खास देखभाल और समझ
– बच्चों और बुजुर्गों के लिए एमआरआई: खास देखभाल और समझ
➤ एमआरआई स्कैन बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक अलग तरह का अनुभव हो सकता है, और उन्हें विशेष देखभाल और समझ की जरूरत होती है. छोटे बच्चों के लिए यह पूरी प्रक्रिया डरावनी हो सकती है, क्योंकि उन्हें चुपचाप लेटे रहना पड़ता है और मशीन का शोर भी उन्हें परेशान कर सकता है.
मेरे भतीजे का जब एमआरआई हुआ था, तो हमने उसे पहले से ही एक कहानी की तरह समझाया था कि वह एक “अंतरिक्ष यान” में जाने वाला है और उसे “सुपरहीरो” की तरह स्थिर रहना होगा.
कई बार बच्चों को स्कैन के दौरान शांत रखने के लिए हल्की नींद की दवा दी जाती है. कुछ अस्पताल बच्चों के लिए विशेष एमआरआई मशीनें और माहौल भी प्रदान करते हैं, जैसे कि कार्टून दिखाना या हेडफ़ोन में उनकी पसंद का संगीत चलाना.
वहीं, बुजुर्ग मरीजों के लिए भी कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. उन्हें अक्सर जोड़ों का दर्द या पीठ की समस्या होती है, जिससे लंबे समय तक एक ही स्थिति में लेटना मुश्किल हो सकता है.
मुझे याद है मेरे दादाजी को एमआरआई के दौरान पीठ दर्द होने लगा था, तो टेक्नीशियन ने उन्हें थोड़ा सपोर्ट देने के लिए तकिया दिया था. उनके लिए पहले से ही बाथरूम जाने और आरामदायक कपड़े पहनने की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण है.
बुजुर्गों को प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट और सरल भाषा में समझाना भी बहुत जरूरी है ताकि वे कम चिंतित महसूस करें.
– एमआरआई स्कैन बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक अलग तरह का अनुभव हो सकता है, और उन्हें विशेष देखभाल और समझ की जरूरत होती है. छोटे बच्चों के लिए यह पूरी प्रक्रिया डरावनी हो सकती है, क्योंकि उन्हें चुपचाप लेटे रहना पड़ता है और मशीन का शोर भी उन्हें परेशान कर सकता है.
मेरे भतीजे का जब एमआरआई हुआ था, तो हमने उसे पहले से ही एक कहानी की तरह समझाया था कि वह एक “अंतरिक्ष यान” में जाने वाला है और उसे “सुपरहीरो” की तरह स्थिर रहना होगा.
कई बार बच्चों को स्कैन के दौरान शांत रखने के लिए हल्की नींद की दवा दी जाती है. कुछ अस्पताल बच्चों के लिए विशेष एमआरआई मशीनें और माहौल भी प्रदान करते हैं, जैसे कि कार्टून दिखाना या हेडफ़ोन में उनकी पसंद का संगीत चलाना.
वहीं, बुजुर्ग मरीजों के लिए भी कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. उन्हें अक्सर जोड़ों का दर्द या पीठ की समस्या होती है, जिससे लंबे समय तक एक ही स्थिति में लेटना मुश्किल हो सकता है.
मुझे याद है मेरे दादाजी को एमआरआई के दौरान पीठ दर्द होने लगा था, तो टेक्नीशियन ने उन्हें थोड़ा सपोर्ट देने के लिए तकिया दिया था. उनके लिए पहले से ही बाथरूम जाने और आरामदायक कपड़े पहनने की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण है.
बुजुर्गों को प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट और सरल भाषा में समझाना भी बहुत जरूरी है ताकि वे कम चिंतित महसूस करें.
➤ गहरी सांस लें, मनपसंद संगीत सुनें (अगर हेडफोन उपलब्ध हों)।
– गहरी सांस लें, मनपसंद संगीत सुनें (अगर हेडफोन उपलब्ध हों)।
➤ गहने, घड़ी, हेयरपिन, क्रेडिट कार्ड – सब कुछ निकाल दें।
– गहने, घड़ी, हेयरपिन, क्रेडिट कार्ड – सब कुछ निकाल दें।
➤ अगर बंद जगहों से डर लगता है, तो इस विकल्प पर विचार करें।
– अगर बंद जगहों से डर लगता है, तो इस विकल्प पर विचार करें।
➤ कॉन्ट्रास्ट एजेंट के उपयोग पर खाने-पीने से बचें।
– कॉन्ट्रास्ट एजेंट के उपयोग पर खाने-पीने से बचें।
➤ एमआरआई रिपोर्ट समझना: घबराएं नहीं, डॉक्टर से बात करें
– एमआरआई रिपोर्ट समझना: घबराएं नहीं, डॉक्टर से बात करें
➤ एमआरआई स्कैन के बाद सबसे उत्सुकता रिपोर्ट का इंतजार रहता है. जब रिपोर्ट हाथ में आती है, तो उसमें लिखे मेडिकल शब्द और जटिल विवरण देखकर अक्सर लोग घबरा जाते हैं.
मुझे याद है जब मेरी रिपोर्ट आई थी, तो उसमें ‘टी2 हाइपरइंटेंसिटी’ जैसे शब्द देखकर मेरा सिर चकरा गया था. रिपोर्ट में आमतौर पर डॉक्टर द्वारा देखा गया विवरण, संभावित डायग्नोसिस और निष्कर्ष शामिल होता है.
इसमें आपके शरीर के स्कैन किए गए हिस्से की विस्तृत जानकारी होती है, जैसे किसी असामान्य वृद्धि, सूजन, चोट या अन्य समस्या का उल्लेख. सबसे बड़ी गलती जो हम में से कई लोग करते हैं, वह है रिपोर्ट को लेकर सीधे गूगल करना.
मेरा मानना है कि यह और भी ज्यादा चिंता पैदा करता है क्योंकि इंटरनेट पर हर लक्षण के लिए सबसे खराब संभावना बताई जाती है. मैंने खुद देखा है कि लोग इंटरनेट पर पढ़कर अपनी बीमारी का ‘स्व-निदान’ कर लेते हैं और फिर अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं.
मेरी सलाह है कि रिपोर्ट मिलते ही तुरंत अपने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें. वे ही सबसे अच्छे तरीके से आपको रिपोर्ट समझा सकते हैं, आपके सवालों के जवाब दे सकते हैं और आगे के इलाज के बारे में बता सकते हैं.
डॉक्टर ही सबसे सही जानकारी देंगे और अनावश्यक डर को दूर कर सकते हैं.
– एमआरआई स्कैन के बाद सबसे उत्सुकता रिपोर्ट का इंतजार रहता है. जब रिपोर्ट हाथ में आती है, तो उसमें लिखे मेडिकल शब्द और जटिल विवरण देखकर अक्सर लोग घबरा जाते हैं.
मुझे याद है जब मेरी रिपोर्ट आई थी, तो उसमें ‘टी2 हाइपरइंटेंसिटी’ जैसे शब्द देखकर मेरा सिर चकरा गया था. रिपोर्ट में आमतौर पर डॉक्टर द्वारा देखा गया विवरण, संभावित डायग्नोसिस और निष्कर्ष शामिल होता है.
इसमें आपके शरीर के स्कैन किए गए हिस्से की विस्तृत जानकारी होती है, जैसे किसी असामान्य वृद्धि, सूजन, चोट या अन्य समस्या का उल्लेख. सबसे बड़ी गलती जो हम में से कई लोग करते हैं, वह है रिपोर्ट को लेकर सीधे गूगल करना.
मेरा मानना है कि यह और भी ज्यादा चिंता पैदा करता है क्योंकि इंटरनेट पर हर लक्षण के लिए सबसे खराब संभावना बताई जाती है. मैंने खुद देखा है कि लोग इंटरनेट पर पढ़कर अपनी बीमारी का ‘स्व-निदान’ कर लेते हैं और फिर अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं.
मेरी सलाह है कि रिपोर्ट मिलते ही तुरंत अपने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें. वे ही सबसे अच्छे तरीके से आपको रिपोर्ट समझा सकते हैं, आपके सवालों के जवाब दे सकते हैं और आगे के इलाज के बारे में बता सकते हैं.
डॉक्टर ही सबसे सही जानकारी देंगे और अनावश्यक डर को दूर कर सकते हैं.
➤ एमआरआई स्कैन खत्म होने के बाद अक्सर मरीज यह सोचते हैं कि क्या इसका कोई साइड इफेक्ट भी होगा. आमतौर पर, एमआरआई एक सुरक्षित प्रक्रिया है और इसके तुरंत बाद कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते.
मुझे तो स्कैन के बाद बस थोड़ा थका हुआ महसूस हुआ था, जो शायद इतने समय तक एक ही स्थिति में लेटे रहने और हल्की घबराहट की वजह से था. अधिकांश लोग स्कैन के तुरंत बाद अपनी सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं.
हालांकि, अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (गैडोलिनियम) का उपयोग किया गया है, तो कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, खुजली या चकत्ते हो सकते हैं. कुछ दुर्लभ मामलों में, गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं, लेकिन ये बहुत कम देखने को मिलती हैं.
यह जानना जरूरी है कि अगर आपको किडनी की समस्या है, तो कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग सावधानी से किया जाता है, या नहीं भी किया जाता. अगर आपको स्कैन के बाद सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, या सांस लेने में दिक्कत जैसे कोई असामान्य लक्षण महसूस होते हैं, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग हुआ है, तो तुरंत अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन से संपर्क करना चाहिए.
हालांकि, ज्यादातर मामलों में, एमआरआई एक बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित प्रक्रिया साबित होती है, जिससे आप बिना किसी चिंता के घर जा सकते हैं.
– एमआरआई स्कैन खत्म होने के बाद अक्सर मरीज यह सोचते हैं कि क्या इसका कोई साइड इफेक्ट भी होगा. आमतौर पर, एमआरआई एक सुरक्षित प्रक्रिया है और इसके तुरंत बाद कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते.
मुझे तो स्कैन के बाद बस थोड़ा थका हुआ महसूस हुआ था, जो शायद इतने समय तक एक ही स्थिति में लेटे रहने और हल्की घबराहट की वजह से था. अधिकांश लोग स्कैन के तुरंत बाद अपनी सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं.
हालांकि, अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट (गैडोलिनियम) का उपयोग किया गया है, तो कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, खुजली या चकत्ते हो सकते हैं. कुछ दुर्लभ मामलों में, गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं, लेकिन ये बहुत कम देखने को मिलती हैं.
यह जानना जरूरी है कि अगर आपको किडनी की समस्या है, तो कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग सावधानी से किया जाता है, या नहीं भी किया जाता. अगर आपको स्कैन के बाद सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, या सांस लेने में दिक्कत जैसे कोई असामान्य लक्षण महसूस होते हैं, खासकर अगर कॉन्ट्रास्ट एजेंट का उपयोग हुआ है, तो तुरंत अपने डॉक्टर या टेक्नीशियन से संपर्क करना चाहिए.
हालांकि, ज्यादातर मामलों में, एमआरआई एक बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित प्रक्रिया साबित होती है, जिससे आप बिना किसी चिंता के घर जा सकते हैं.






